0 Indiaah Indiaah

Alternative content

Get Adobe Flash player

Last Sunday chhattisgarh
उज्ज्वला योजना: 50 लाख का इंश्योरेंस, गैस सिलेंडर के साथ, जानिए कैसे?   |   नीति आयोग की कृषि पर मुख्यमंत्रियों की बैठक, कृषि मंत्री तोमर भी मौजूद   |   दिल्ली पुलिस ने आग से बचाई जिंदगियां   |   नाबालिग से दुष्कर्म का वीडियो वायरल, बहुत कोशिशों के बाद मामला दर्ज   |   संसद मार्ग स्थित एसबीआई की इमारत में लगी आग, मोके पर दमकल की गाड़िया मौजूद   |   एंबुलेंस कर्मियों ने सरकार पर लगाए आरोप, बहुत दिनों से जारी रखी हड़ताल   |   एक राष्ट्र एक कार्ड योजना   |   मुंबई के डोंगरी इलाके में 4 मंजिला इमारत गिरने से दो की मौत   |   साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा बेहद खास, जानें भारत में किस समय दिखेगा ग्रहण   |   पीएम नरेंद्र मोदी की अर्थव्यवस्था में सुधार और बेरोजगारी दूर करने की तैयारी, दो कैबिनेट समितियां गठित   |  
जीवन और शैली समाचार
नन्ही परी गौरैया अब कम ही नजर आती है
लखीमपुर खीरी| नन्ही परी गौरैया अब कम ही नजर आती है। दिखे भी कैसेए हमने उसके घर ही नहीं छीन लिए बल्कि उसकी मौत का इंतजाम भी कर दिया। हरियाली खत्म कर कंक्रीट के जंगल खड़े किएए खेतों में कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर उसका कुदरती भोजन खत्म कर दिया और अब मोबाइल टावरों से उनकी जान लेने पर तुले हुए हैं। फिर क्योंकर गौरैया हमारे आंगन में फुदकेगी, क्यों वह मां के हाथ की अनाज की थाली से अधिकार के साथ दाना चुराएगी|

गौरेया 25-30 साल पहले तक घर-परिवार का एक अहम हिस्सा थी। घर के आंगन में फुदकती गौरैया, उनके पीछे नन्हे-नन्हे कदमों से भागते बच्चे। अनाज साफ करती मां के पहलू में दुबक कर नन्हे परिंदों का दाना चुगना और और फिर फुर्र से उड़कर झरोखों में बैठ जाना। ये नजारे अब शहरों में ही नहीं गांवों में भी नहीं दिखाई देते।

फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से परिंदों की दुनिया ही उजड़ गई है। गौरैया का भोजन अनाज के दाने और मुलायम कीड़े हैं। गौरैया के चूजे तो केवल कीड़ों के लार्वा खाकर ही जीते हैं। कीटनाशकों से कीड़ों के लार्वा मर जाते हैं। ऐसे में चूजों के लिए तो भोजन ही खत्म हो गया है।

गौरैया आम तौर पर पेड़ों पर अपने घोंसले बनाती है। पेड़-पौधे लगातार कम होते जा रहे हैं। यह घर के झरोखों में भी घोंसले बना लेती है। अब घरों में झरोखे ही नहीं तो गौरैया घोंसला कहां बनाए। मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें, अनलेडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से निकलने वाली जहरीली गैस भी गौरैयों और अन्य परिंदों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

इन सबके बीच गौरैया के संरक्षण के लिए छिटपुट सराहनीय प्रयास भी हो रहे हैं। खीरी के सिकंद्राबाद कसबे के मदनचंद्र मिश्र गौरैया संरक्षण के काम में लगे हुए हैं। उनके घर में 350 से अधिक गौरैया संरक्षण पा रही हैं। खीरी में कांग्रेस नेता वैशाली अली ने गौरैया दिवस पर एक समारोह में गौरैया बचाने की मुहिम में योगदान देने वालों को पुरस्कृत करने की बात कही है।

ऐसे मनाएं रूठी नन्ही परी को

-घरों में कुछ ऐसे झरोखे रखें, जहां गौरैया घोंसले बना सकें।

-छत और आंगन पर अनाज के दाने बिखेरें।

-आंगन और छतों पर पौधे लगाएं ताकि पक्षी आकर्षित हों।

-फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग न करें।

-घर की मुंडेर पर मिट्टी के बरतन में पानी रखें।

-अनलेडेड पेट्रोल का इस्तेमाल न करें।
back
next
दिनांक : 20 March 2013 10:35:41 द्वारा : Hrishikesh पसंद करे :
शेयर करे :
TAGS : #
एक नजर यहाँ भी
SamacharPatr