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21 दिन में छह गोल्ड जीतने वाली भारतीय एथलीट ने रचा इतिहास, आइये जानते है उन्होंने कैसे किया ये चमत्कार
gnn bureau|

खेल की दुनियामें एथलीट हिमादास ने चेकगणराज्य में आयोजितट्रैक एंड फील्डप्रतिस्पर्धा में स्वर्णपदक जीतने कासिलसिला जारी  रखाहै। 21 दिन केअंदर छह स्वर्णपदक जीतकर जोकारनामा हिमा नेकर दिखाया है,वह अभी तकइतिहास में किसीने नहीं दिखायाहै। सब जाननाचाहते हैं इसअसाधारण उपलब्धि के बारेमें? आइए उनकेकरीबी दोस्त पलाशसे जानें, आखिरहिमा में कहांसे आता हैऐसा साहस?

चैंपियंस भीड़ सेअलग सोचते हैंऔर यह अलगसोच इतिहास बनातीहै। ऐसी हीएक चैंपियन हैंहिमा दास। वहगत वर्ष जकार्ताएशियन गेम्स सेपहली बार दुनियाकी नजरों मेंआई और आजबन गई हैंहर किसी कीआंख का तारा।यह 18 वर्षीय किशोरीआज अपने प्रदर्शनोंसे चौंका रहीहै। अपने हमउम्र एथलीटों केसाथ-साथ सबकीप्रेरणा बन गईहैं।

जकार्ता एशियन गेम्स मेंराष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुयेउन्होंने रजत पदकजीता था, लेकिनइस साल चेकगणराज्य में आयोजितट्रैक एंड फील्डप्रतिस्पर्धा में 21 दिन केअंदर छह स्वर्णपदक जीतकर हिमाने कारनामा करदिखाया है, वहकोई सामान्य बातनहीं। इस प्रतियोगिताके दौरान हिमाने 400 मीटर कीदौड़ में 51.46 सेकंडका समय निकालकरस्वर्ण पदक जीताहै और वहये उपलब्धि हासिलकरने वाली पहलीभारतीय महिला एथलीट बनगई हैं।

उनके करीबी और बचपनके दोस्त पलाशने बताया कीउसे अपना लक्ष्यबखूबी पता है।उसका एक हीलक्ष्य है हरप्रतियोगिता में भागनेकी टाइमिंग बेहतरकरते जाना। बसइसी क्रम मेंउसे मेडल भीमिल जाता है।यानी हिमा कालक्ष्य मेडल हासिलकरना कम, अपनीटाइमिंग को श्रेष्ठस्तर पर लानाहै। पलाश केअनुसार, हिमा मेडलजीतकर कूल रहतीहै, क्योंकि उसकालक्ष्य मेडल परकम, अपने प्रदर्शनपर अधिक है।इसके लिए वहकड़ी मेहनत करतीहैं और हरबार खुद कोचुनौती देती है।इसके लिए घरमें बड़े पापाउसे खूब प्रोत्साहितकरते हैं।

पलाश के मुताबिक,हिमा शुरू सेजिद्दी हैं। हमहार जाते हैं,लेकिन वह तबतक अड़ी रहतीहै, जब तकवह टारगेट हासिलन कर लें।इसी क्रम मेंपलाश एक किस्साभी सुनाते हैं।पिछली बार जबवह गांव मेंएक प्रतियोगिता जीतनेके बाद लौटीथीं और सबसेपहले दोस्तों सेमिलने गईं। अपनेछह दोस्तों मेंहिमा अकेली लड़कीहैं, जिन्हें बाइकचलाने का खूबशौक है। दोस्तोंमें किसी नेकह दिया किआओ बाइक रेसलगाएं तो वहनहीं सोचती किमना करना है।वह रेस लगातीहैं और जीतकर दिखाती हैं।वह हरदम तत्पररहती हैं। वहचाहे भागने कीबात हो यादोस्तों की मददकी बात।

मदद की जहांतब बात हैतो उल्लेखनीय हैकि हिमा नेअसम बाढ़ पीडि़तोंको अपनी पुरस्कारराशि का एकबड़ा हिस्सा दानमें दिया है।किसी नए खिलाड़ीके लिए इसतरह का भावनात्मककदम प्रशंसनीय औरप्रेरक पहल है।


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दिनांक : 25 July 2019 12:26:33 द्वारा : GNN Bureau पसंद करे :
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TAGS : # फील्ड प्रतिस्पर्धा , # चैंपियंस , # जकार्ता एशियन गेम्स , # 400 मीटर , #
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