0 Indiaah Indiaah

Alternative content

Get Adobe Flash player

Last Sunday chhattisgarh
राजनीतिक समाचार
दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह पंचतत्व में विलीन
GNN Bureau| वर्ष 1937 में ‘हिंदी-हटाओ आंदोलन’ से. दक्षिण भारत की सियासत में एंट्री करने वाले और सबसे ज्यादा 13 बार विधायक बनने वाले 94 वर्षीय डीएमके प्रमुख और दक्षिण भारत के दिग्गज नेता एम करुणानिधि (M Karunanidhi) का निधन हो गया है. उनके पास 50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव था एम करुणानिधि का परिवार संभवत: मुलायम सिंह यादव के परिवार के बाद देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार माना जाता है. उनके बेटे सांसद और मंत्री रह चुके हैं और बेटी अब भी डीएमके सांसद हैं. 94 एम. करुणानिधि (M Karunanidhi) कोयंबटूर में रहकर व्यावसायिक नाटकों और फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिख रहे थे इसी दौरान पेरियार ने करूणानिधि की प्रतिभा देख उन्हें पार्टी की पत्रिका ‘कुदियारासु’ का संपादक बना दिया गया. हालांकि इसके बाद 1947 में पेरियार और अन्नादुराई के बीच मतभेद हो गए और 1949 में नई पार्टी ‘द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’यानी डीएमके की स्थापना हुई. यहां से पेरियार और अन्नादुराई के रास्ते अलग हो गए.डीएमके की स्थापना के बाद एम. करुणानिधि की अन्नादुराई के साथ नजदीकियां बढ़ती चली गईं. वर्ष 1967 के विधानसभा चुनावों में डीएमके ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और अन्नादुराई राज्य के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने. हालांकि सत्ता संभालने के दो ही साल बाद ही वर्ष 1969 में अन्नादुराई का देहांत हो गया. अन्नादुराई की मौत के बाद करुणानिधी ने सत्ता की कमान संभाली. वर्ष 1971 में वे दोबारा अपने दम पर जीतकर आए और मुख्यमंत्री बने. उन्होंने पटकथा लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया था. अपनी पहली फिल्म 'राजकुमारी' से ही वे काफी लोकप्रिय हो गए. उन्होंने 75 से अधिक पटकथाएं लिखी थी .
back
next
दिनांक : 07 August 2018 09:45:33 द्वारा : GNN Bureau पसंद करे :
शेयर करे :
TAGS : # DMK , # Karunanidhi , # DMK chief , # Ex CM north india
एक नजर यहाँ भी
SamacharPatr